मध्यप्रदेश जेल विभाग और राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय, गांधीनगर ने मनोसामाजिक काउंसलिंग के लिए सहयोग तय किया है। 21 अगस्त की विभागीय सूचना के अनुसार, जेल मुख्यालय भोपाल में हुए समझौते में बंदियों की मानसिक स्वास्थ्य जरूरतों पर काम करने और जेल कर्मचारियों को प्रशिक्षित करने की रूपरेखा रखी गई।

इससे पहले 6 से 12 जुलाई तक क्षेत्रीय जेल प्रबंधन एवं शोध संस्थान, भोपाल में सात दिन का प्रशिक्षण हुआ था। अलग-अलग जेलों से 28 कर्मचारी आए। इनमें पुरुष नर्स, फार्मासिस्ट, लैब तकनीशियन, मुख्य प्रहरी और प्रहरी शामिल थे।

प्रशिक्षक तैयार करने की योजना

आधिकारिक सूचना के अनुसार शुरुआती प्रशिक्षण में तनाव से जूझ रहे बंदियों की पहचान और काउंसलिंग पर काम किया गया। प्रशिक्षित कर्मियों ने बाद में अपनी जेलों में काउंसलिंग की।

समझौते में चुने हुए कर्मियों को विश्वविद्यालय भेजकर मास्टर ट्रेनर कोर्स कराने की योजना है। ये प्रशिक्षक लौटकर दूसरे जेल अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रशिक्षण देंगे। इस तरह सीखने वाले कर्मियों का काम आगे सहकर्मियों को तैयार करने तक बढ़ेगा।

भोपाल में केंद्र अगला प्रस्तावित चरण

पहले चरण में केंद्रीय जेल भोपाल में विभाग का पहला मनोसामाजिक काउंसलिंग केंद्र स्थापित करने की योजना है। दूसरी जेलों में विस्तार भोपाल केंद्र के अनुभव और परिणाम देखने के बाद चरणबद्ध रखा गया है।

21 अगस्त की सूचना समझौते और हो चुके प्रशिक्षण को दर्ज करती है। केंद्र की स्थापना तथा दूसरे संस्थानों में विस्तार उसी सूचना में आगे के कदम हैं।

मुख्य बातें

  • 21 अगस्त 2026 की विभागीय सूचना में जेल विभाग और राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय के काउंसलिंग सहयोग समझौते का विवरण है।
  • हस्ताक्षर कार्यक्रम जेल मुख्यालय, भोपाल में हुआ।
  • समझौते से पहले 6–12 जुलाई को क्षेत्रीय जेल प्रबंधन एवं शोध संस्थान, भोपाल में सात दिवसीय प्रशिक्षण हुआ।

स्रोत और संदर्भ

  1. मध्यप्रदेश जनसम्पर्क विभाग / MPInfo · मध्यप्रदेश की जेलों में मानसिक रूप से बीमार एवं तनावग्रस्त बंदियों के मानसिक सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण पहल ↗21 अगस्त 2026

सार्वजनिक प्राथमिक स्रोतों पर आधारित संपादित लेख। स्रोत जाँच: 15 सितंबर 2026।

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